मुगलिया हरम में पैदा होने वाले बच्चों को लगता है उनके अब्बू, दादा, परदादा जिहादी मुगलों का गधा हांकते हुए आया था। इसलिए वो भी मुगल हीं है।🤦
हे शांतिदूतों, तुम्हारी अम्मी, दादी, परदादी मुगलिया हरम में काफिरों से युद्ध नहीं लड़ रही थी, वो बेचारी खुद भी काफिर हीं थी। उन्हीं लोगों पर आतंकवादी, आक्रमणकारी, मुगलों ने 800 वर्षों तक शासन किया।
उन्हीं महिलाओं, बच्चियों को मुगलिया हरम में जिहादियों ने लौंडी बनाकर रखा, और हरम में जिहादी मुगल और गधा हांकने वालों ने उनका R@pe किया था। और उसी R@pe से पैदा होने वाले बच्चे और उन बच्चों के बच्चे, आज भारतीय उपमहाद्वीप (भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, आदि) में मुगलिया/अरबी नाम से पहचाना जाता है। 🤦
लेकिन बला/त्कार से पैदा होना 1 सदमा। ऊपर से बचपन से हीं उन बेचारे बच्चों को, आसमानी किताब पढ़ाया जाता है।
जिस कारण उन बच्चों और उन बच्चों के बच्चों का भी, सोचने समझने का क्षमता हीं खत्म हो जाता है। (जैसे - कहा जाता है कि, Is🤪…आम अंदर दिमाग बाहर )🙆
जिस कारण वो बेचारे अपने अम्मी, दादी, परदादी के बला/त्कारी मुगलों को हीं अपना पूर्वज अब्बू, दादा, परदादा मानता है।🤦
⭐ वैसे तुम्हारा नाम तो मुगलिया / अरबी नहीं है ना ?🤦
काफिर नाम वालों के पूर्वजों ने अपना सब घर, संपत्ति आदि छोड़ कर मुगलिया कब्जे वाले स्थानों को छोड़ कर हिंदू राज वाले स्थानों में चला गया था।
या जजिया देकर खुद को सुरक्षित रखा।
या फिर वो मुगलों से लड़ते हुए बलिदान हो गया।
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