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काफिर टट्टी 💩 है, मुसलमानों को काफिरों से ताल्लुक नहीं रखनी चाहिए।

यह है मौलाना खादिम हुसैन रिजवी (बरेलवी इस्लाम को मानने वाला)


इसने मुहम्मद साहब का जिक्र करते हुए कहा:- काफ़िरों (गैर मुस्लिमों) से, यहूदियों से, ईसाईयों से, हिंदुओं से, सिखों से, एक मुसलमान ताल्लुक़ (संबंध) नहीं रख सकता।

आप (मुहम्मद साहब) ने फरमाया अगर काफ़िरों से ताल्लुक़ जरूरी भी है ना तो बस इतना हीं है जैसे लैट्रिन (शौचालय, toilet) के अंदर जाना मजबूरी है। लैट्रिन के साथ जितना ताल्लुक़ बंदे (इंसान) की मजबूरी है, उसके बगैर गुजारा नही।

वीडियो 👉 गैर मुस्लिमों (काफिरों) से दोस्ती रखने पर मौलाना की राय



तो आप (मुहम्मद साहब) ने फरमाया अगर जिंदगी में मुसलमानों को काफ़िरों से ताल्लुक़ रखना भी परे तो इस नियत से रखे जैसे लैट्रिन (शौचालय, toilet) के बगैर गुजारा नहीं है लेकिन वहाँ जाकर कोई कश्तूरी (सुगंध) सुंघता नहीं है।


यही है इस्लाम ☪️ की सच्चाई🤔

मौलाना खादिम हुसैन रिजवी से जुड़ी कुछ रोचक जनकारी - इसी मौलाना का दिया हुआ नारा है "लब्बैक या रसूलल्लाह"
"गुस्ताखे नबी की एक सज़ा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा"
और "नामूसे रिसालत जिंदाबाद"

इस नारे को कहते हुए दुनिया भर में कई काफ़िरों के सर तन से जुदा किए गए।

आप भारत के राजस्थान में दर्जी कन्हैया लाल का कत्ल करते वक़्त भी जिहादियों द्वारा "लब्बैक या रसूलल्लाह" का नारा सुन सकते है। 🤔🤔

UP के प्रयागराज में बस कंडक्टर हरिकेश विश्वकर्मा पर चापड़ से जानलेवा हमला करने के पहले जिहादी लारेब हाशमी ने वीडियो बनाया था उसमें भी आप "लब्बैक या रसूलल्लाह" का नारा सुन सकते है। 🤔🤔

कोई सर तन से जुदा, सर तन से जुदा"
और "नामूसे रिसालत जिंदाबाद"

इस नारे को कहते हुए दुनिया भर में कई काफ़िरों के सर तन से जुदा किए गए।

आप भारत के राजस्थान में दर्जी कन्हैया लाल का कत्ल करते वक़्त भी जिहादियों द्वारा "लब्बैक या रसूलल्लाह" का नारा सुन सकते है। 🤔🤔

UP के प्रयागराज में बस कंडक्टर हरिकेश विश्वकर्मा पर चापड़ से जानलेवा हमला करने के पहले जिहादी लारेब हाशमी ने वीडियो बनाया था उसमें भी आप "लब्बैक या रसूलल्लाह" का नारा सुन सकते है। 🤔🤔

Video link 👉 गैर मुस्लिम टट्टी 💩 है, गैर मुस्लिमों (काफिरों) से मुसलमान दोस्ती नहीं रख सकता


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